छेड़ो मोहे री, बोगनवेलिया 

काहे चढ़त पड़ोसन की खिड़कियाँ 

 

नीर बहाऊँ मिट्टी में तोरी 

बोयी आशा थी बारह बरस पूरी 

भोर होत देखूं गुलाबी छाया उस ओर 

लाज आयी तोहे, बोगनवेलिया!

 

कैसी यह भलाई तोरी, सखी 

फूलदानी है सूनी, अधूरी हमरी बतियाँ   

फिर बरसत काहे हंसी तोरी पड़ोसन की खिड़कियाँ 

छेड़ो मोहे री, बोगनवेलिया!  

सई कोरन्नेखांडेकर

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